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पूर्वोत्तर भारत में कोरोना आपदा को अवसर में परिवर्तित करती विद्या भारती

डाॅ. पवन तिवारीसह संगठन मंत्रीविद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र स्वामी विवेकानन्द के विचारों में बालक की अन्तर्निहित शक्तियों का बहिरागमन ही शिक्षा है। वे कहते थे कि शिक्षा मनुष्य को साहसी बनाती है, जिससे वह किसी भी कार्य को आसानी से करने हेतु सन्नद्ध हो जाता है। वस्तुतः उत्कृष्ट शिक्षा को प्राप्त करना प्रत्येक बालक का […]

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पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी की स्थिति एवं संभावनाएँ

ब्रह्माजी राव, अखिल भारतीय मंत्री एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री विद्या भारती राष्ट्र संघ में कुल 252 देश हैं। इन देशों में प्रायः 700 करोड़ लोग रहते हैं। दुनिया में अत्यधिक संख्या में लोग मंडारिन (चीनी) भाषा में बात करते हैं। दूसरे स्थान पर अंग्रेजी, तीसरे स्थान पर स्पेनिश तथा चैथे स्थान पर हिन्दी है। […]